गर्भपात के बाद होती हैं ये दिक्कतें, जानें लक्षण-बचाव

By - Jun 07, 2018 05:37 AM
गर्भपात के बाद होती हैं ये दिक्कतें, जानें लक्षण-बचाव

गर्भपात होना किसी भी महिला के लिए दुखद होता है। ऐसा होने पर महिलाएं अक्सर अवसाद से घिर जाती हैं। लेकिन गर्भपात के बाद प्रॉपर केयर, न्यूट्रिशस डाइट और एक्सरसाइज पर फोकस किया जाए, तो अवसाद से बचा जा सकता है। गर्भपात यानी एबॉर्शन के बाद लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं अवसाद से घिर जाती हैं। कुछ महिलाओं में तो गर्भपात के बाद अवसाद इतना गहरा हो जाता है कि दूसरी बार गर्भधारण करने पर भी उनका अवसाद दूर नहीं होता। आमतौर पर माना जाता है कि स्वस्थ शिशु को जन्म देने के बाद महिलाओ में गर्भपात के बाद हुआ अवसाद, भय और तनाव कम हो जाता है। लेकिन यह इतना आसान नहीं होता है।
लगभग 13 प्रतिशत महिलाओं में गर्भपात के कारण हुए अवसाद के लक्षण तीन साल तक दिखाई देते हैं और दो बार गर्भपात होने पर तो 19 प्रतिशत महिलाओं में अवसाद के लक्षण तीन साल बाद भी दिखाई देते हैं। इस कारण महिलाएं बहुत परेशान रहती हैं। ऐसे में इस अवसाद से बाहर निकलना बहुत जरूरी है। 
लक्षण

  • गर्भपात के बाद महिला में अवसाद के कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं।
  • आत्मग्लानि से भर जाना।
  • छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक गुस्सा होना।
  • बहुत ज्यादा दुखी होना।
  • भूख न लगना या खाना खाने का मन नहीं करना।
  • उत्तेजित महसूस करना।
  • अत्यधिक थका हुआ महसूस होने के बावजूद नींद न आना और हर समय सोने की कोशिश करना।
  • अपने शरीर पर नियंत्रण न रहना।
  • ध्यान केंद्रित करने में समस्या आना। 

डाइट हो ऐसी
पौष्टिक भोजन आपके शरीर को हील करने में मदद करता है। इसलिए गर्मपात के बाद ऐसे भोजन का सेवन करें, जो फॉलिक एसिड से भरपूर हो जैसे हरी सब्जियां, अंडे, बीफ, सोयाबीन, अंगूर, संतरे। प्रोटीन, विटामिन ए और सी से भरपूर भोजन का भी सेवन करें। इसके अलावा अगर आप नॉन-वेजीटेरियन हैं, तो चिकन या फिश खाएं। यह आपके शरीर को अमीनो एसिड उपलब्ध कराता है। 
इनके सेवन से बचें

  • कुछ आहार ऐसे होते हैं, जो गर्भपात के बाद खाने से बचना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। जैसे कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें, क्योंकि इससे ब्लड में शुगर का स्तर अनियंत्रित हो सकता है और अवसाद के लक्षण गहरा सकते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन आपके कमजोर शरीर के लिए भी उपयुक्त नहीं है।
  • ऐसे भोजन का सेवन कम करें, जिसमें फाइबर की मात्रा कम हो।
  • जंक फूड जैसे पिज्जा, बर्गर के सेवन से बचें। इन्हें अवसाद बढ़ाने वाला भोजन माना जाता है।
  • सोया प्रोडक्ट का सेवन न करें।
  • प्रोसेस्ड, डिब्बाबंद भोजन का सेवन न करें। इनमें प्रिजरवेटिव्स होते हैं, जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • फ्रोजन फूड के सेवन से भी बचें।
  • कॉफी में कैफीन होता है, जो गर्भाशय के लिए अच्छा नहीं होता है। इसलिए कॉफी के सेवन से भी बचें।

जरूरी है प्रॉपर केयर 
गर्भपात की वजह से महिला का दुखी होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर इस वजह से लगातार अगर आप दुख में डूबी रहेंगी, तो इससे सेहत पर बुरा असर पड़ेगा। इसलिए कुछ बातों का ध्यान रखें- 
संक्रमण से बचें: संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। रोज नहाएं। जब तक ब्लीडिंग और डिसचार्ज बंद नहीं हो जाता, तब तक स्विमिंग न करें। गर्भपात के दो सप्ताह तक शारीरिक संबंध स्थापित न करें। अगर दो सप्ताह बाद भी शारीरिक संबंध बनाते समय तेज दर्द हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
सावधान रहें: गर्भपात के बाद अपनी दैनिक गतिविधियां करते समय सावधान रहें। हालांकि कई महिलाएं गर्भपात के तुरंत बाद ही सामान्य जीवनशैली जीने लगती हैं। लेकिन कुछ दिनों तक आराम करना ठीक रहता है। 
एक्सरसाइज करें: हल्की–फुल्की एक्सरसाइज आपको गर्भपात के बाद होने वाली शारीरिक समस्याओं से निपटने में सहायता कर सकती है। अगर आप नियमित रूप से एक्सरसाइज करेंगी, तो आपको तनाव कम होगा।
असल में एक्सरसाइज करने से एंडॉरफिन का स्रावण होता है, जिसे फीलगुड हार्मोन कहते हैं। गर्भपात के बाद रोजाना 30 मिनिट तक टहलना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। इसके अलावा आप योग ट्रेनर की देखरेख में तनाव से बचने के लिए योगा और ध्यान भी करें।
चेकअप कराएं: अपने डॉक्टर से नियमित रूप से जांच कराएं कि बैक्टीरिया के संक्रमण, सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी) और दूसरी समस्याओं से ग्रस्त तो नहीं, जो आपको सामान्य रूप से गर्भधारण करने में रुकावट डालेगा। 
फैमिली सपोर्ट जरूरी: मिसकैरिज के बाद जब महिलाएं स्वस्थ शिशु को जन्म देती हैं, इसके बावजूद उनमें तीन साल तक अवसाद के लक्षण देखे जाते हैं। उन महिलाओं में गर्भपात के बाद अवसाद की समस्या और अधिक होती है, जिनमें अवसाद का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहास रहा हो। लेकिन कुछ महिलाओं में अवसाद की समस्या नहीं होती या कम होती है। इसके बायोलॉजिकल कारण हो सकते हैं। इसके साथ ही परिवार और जीवनसाथी का सहयोग, प्यार मिले तो भी महिला गर्भपात के बाद अवसाद से बच सकती है।