फंसा पेंच, यूपी में महागठबंधन बनने से पहले,सपा-बसपा कांग्रेस काे छाेड़कर चुनाव लड़ सकती हैं

By - Jun 13, 2018 12:05 PM
फंसा पेंच, यूपी में महागठबंधन बनने से पहले,सपा-बसपा कांग्रेस काे छाेड़कर चुनाव लड़ सकती हैं

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के 'विजय रथ' को रोकने के लिए विपक्षी दलों की ओर से अब तक तीन ट्रायल किए गए हैं। विपक्ष को इन तीनों ट्रायल फार्मूले से बीजेपी को मात और विपक्ष को जीत का मंत्र मिला। बीजेपी के खिलाफ 2019 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष इन्हीं फार्मूले पर महागठबंधन बनाकर चुनावी समर में उतरता है, तो मोदी के लिए सत्ता बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन देश के सबसे बड़े प्रदेश यूपी में ही महागठबंधन काे लेकर पेंच फंसता नजर आ रहा है। 
यूपी में महागठबंधन की चुनावी रणनीति में कांग्रेस बाहर रह सकती है। माना यह जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 35 और बहुजन समाज पार्टी 40 सीटों पर लड़ सकती हैं। बाकी सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी। 
अखिलेश ने दिए समझौते की रूपरेखा के संकेत 
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस समझौते की रूपरेखा के संकेत दे दिए हैं। हाल ही में गठबंधन काे लेकर अखिलेश ने कहा कि बसपा से गठबंधन के लिए अगर हमें 2-4 सीटें भी कुर्बान करने पड़ी ताे हम पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में तीन सीटें राष्ट्रीय लोक दल को दी जा सकती हैं। 
अमेठी-रायबरेली में उम्मीदवार नहीं उतारेगा गठबंधन
सपा के सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बन रही विपक्षी एकता में कांग्रेस को यूं तो शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन राहुल गांधी और सोनिया गांधी की सीटें अमेठी और रायबरेली पर विपक्ष अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा। दरअसल, राज्य में कांग्रेस अपना आधार खो चुकी है। फूलपुर और गोरखपुर के लोकसभा उपचुनावों में अकेले लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवारों को महज 19,353 और 18,858 वोट ही मिले। 
सपा और बसपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के पास अब न दलित वोट हैं, न पिछड़े और न ही अल्पसंख्यक। कांग्रेस को अधिकतर वोट सवर्णों के मिल रहे हैं जो भाजपा के भी वोट बैंक हैं। यानी कांग्रेस को मिल रहा हर वोट भाजपा के खाते से ही जा रहा है। यदि कांग्रेस विपक्षी एकता में शामिल हो जाती है तो ये सवर्ण भी भाजपा में चले जाएंगे। इसीलिए सपा-बसपा को लगता है कि कांग्रेस के अलग लड़ने से ही उन्हें ज्यादा फायदा है।
पिछले लोकसभा चुनाव में इसलिए हारीं पार्टियां 
पिछले लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों के अलग-अलग लड़ने की वजह से भाजपा को सहयोगियों के साथ राज्य की 80 में से 73 सीटें मिली थीं जबकि सपा पांच और कांग्रेस दो सीटों पर ही जीत पाई थी। बसपा के खाते में एक भी सीट नहीं आई थी। यही वजह ही कि इस बार सभी विपक्षी दल साथ मिलकर लड़ने का प्रयास कर रहे हैं।