वायु प्रदूषण से उत्तर प्रदेश के सात शहरों में समयपूर्व मृत्यु दर में बढ़ोतरी

By Akhilesh Srivastava - May 22, 2018 03:40 PM
वायु प्रदूषण से उत्तर प्रदेश के सात शहरों में समयपूर्व मृत्यु दर में बढ़ोतरी

वायु प्रदूषण के कारण उत्तर प्रदेश के सात शहरों मेंसमयपूर्व मृत्यु दर में बढ़ोतरी

सीड और आइआइटी-दिल्ली की रिपोर्ट के अनुसार यूपी में वायु प्रदूषण मेंखतरनाक वृद्धि

निलय टाइम्स 

अखिलेश श्रीवास्तव

लखनऊ, 22 मई: पिछले दो दशकों में खराब एयर क्वालिटी ही वह प्रधान कारणहै, जिस वजह से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के शहरी इलाकों में मृत्यु दर मेंबढ़ोतरी हुई है। यह निष्कर्ष है, सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट(सीड) और आइआइटी-दिल्ली द्वारा तैयार एक रिसर्च रिपोर्ट ‘नो व्हाट यू ब्रीथ’1(जानिए आप कैसी हवा में सांस ले रहे हैं) का, जिसके अनुसार बढ़ते वायु प्रदूषणके कारण गंगा के मैदानी इलाकों में स्थित उत्तर भारत के शहरों में ‘समयपूर्व मृत्यु-दर (प्रीमैच्योर मोर्टेलिटी)’ चिंताजनक ढंग से प्रति लाख आबादी पर 150-300 व्यक्ति के करीब पहुंच गयी है। यह भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि अध्ययनमें शामिल 11 शहरों में (रांची को छोड़कर) सभी जगह एक प्रदूषक तत्व- पर्टिकुलेट मैटर (पीएम2.5) का स्तर नेशनल स्टैंडर्ड से दो गुना ज्यादा2 और विश्वस्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सालाना स्वीकारयोग्य सीमा3 से आठ गुनाज्यादा हो गया है। इन ग्यारह शहरों में उत्तर प्रदेश के आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, बिहार राज्य के पटना, गया व मुजफ्फरपुरऔर झारखंड प्रदेश के रांची को शामिल किया गया। 

यह रिपोर्ट सालाना मध्यमान पर्टिकुलेट मैटर (पीएम2.5) के संकेंद्रण की पड़तालकरता है, जिसे पिछले 17 सालों के सैटेलाइट डाटा के गहन विश्लेषण से तैयारकिया गया है। इस रिपोर्ट में शामिल वायु प्रदूषण से त्रस्त 8 शहरों को पहले हीवर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के द्वारा तैयार ग्लोबल एयर क्वालिटी एसेसमेंट परआधारित रिपोर्ट ‘ग्लोबल एंबियंट एयर क्वालिटी डाटाबेस (2018)4 में स्थान मिलचुका है।

उत्तर प्रदेश से संबंधित मुख्य निष्कर्षों में ये तथ्य उभर कर सामने आये हैं कि गंगाके मैदानी प्रदेश के पश्चिमी छोर पर बसे मेरठ (99.2μg/m3) और आगरा(91μg/m3) जैसे शहरों में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण की समस्या है। यह रिपोर्टइस तथ्य पर जोर देती है कि इंडो गंगेटिक एरिया में पीएम2.5 एक्सपोजर संबंधीउत्सर्जन उभार पश्चिम से पूर्वी इलाकों की ओर जा रहा है। अध्ययन में शामिल 11 शहरों में वाराणसी में पीएम2.5 का विस्तार सबसे तेज पाया गया है। पिछले 17 वर्षों में वाराणसी में पीएम2.5 के स्तर ने 28.5μg/m3 तक बढ़ने का संकेत दियाहै। प्रदेश के प्रमुख शहरों में गिने जानेवाले मेरठ, आगरा, लखनऊ, वाराणसी औरगोरखपुर शामिल है।