बहराइच में कफ़न चोर अधिकारियो को गरीब बेटियो की शादी अनुदान में भी चाहिये कमीशन

By Akhilesh Srivastava - Jun 05, 2018 06:10 AM
बहराइच में कफ़न चोर अधिकारियो को गरीब बेटियो की शादी अनुदान में भी चाहिये कमीशन

बहराइच के कफ़न चोर अधिकारियो को गरीब बेटियो के शादी अनुदान में भी चाहिये कमीशन

निलय टाइम्स कार्यालय
अखिलेश श्रीवास्तव
लखनऊ। बहराइच जिले में अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के गरीब बेटियो के शादी में मिलने वाला अनुदान बीस हज़ार में जिले 
के कफ़न चोर अधिकारियो को भारीभरकम कमीशन चाहिये।गरीब यदि कमीशन न दे सके तो दो दो महीने रिपोर्ट तक नही लगती है।इन भ्रष्ट अधिकारों पर तेज तर्रार ईमानदार जिलाधिकारी व प्रदेश के मुख्यमंत्री का कोई ख़ौफ नही है।बेटी की शादी अनुदान में कमीशन न मिलने से रिपोर्ट के आभाव में जिले की सैकड़ो बेटियो की शादी बिना अनुदान के ही हो गयी ओर बहुत सी बेटियो के माता पिता को अभी भी शादी अनुदान की दरकार है।
जनपद बहराइच के ग्राम मुसगढ़ा निवासी हुसैनी अनुसूचित जाति का गरीब मजदूरी पेशा कर किसी तरह से  गुजर बसर कर रहा है।इसके पास एक किसानी के लिये एक बिस्वा जमीन तक नही है।रोज मजदूरी कर परिवार पाल रहा है।इस गरीब भूमिहीन मजदूर ने अपनी बेटी की शादी के लिये सरकार से अनुदान के लिये ऑनलाइन दिनांक 18 अप्रैल 2018 को पंजीयन संख्या 3146112037R किया।बेटी की शादी 1 मई 2018 को होनी थी जो बिना अनुदान के ही कर्ज पानी लेकर किसी तरह से किया गया।शादी के अनुदान के लिये जाति आय प्रमाणपत्र के साथ आधार कार्ड शादी का कार्ड लड़का लड़की की उम्र प्रमाणपत्र भी लगा कर मूल कापी उपजिलाधिकारी सदर बहराइच के कैम्प कार्यालय में जमा किया गया ।जिसमें खंडविकाश अधिकारी चित्तौर को मेल पर रिपोर्ट लगाने के लिये उसी दिन भेज गया।लेकिन समाचार लिखने तक व्लाक चित्तौर से बेटी की शादी अनुदान में रिपोर्ट नही लगाई गई।रिपोर्ट के अभाव में गरीब मजदूर ने गांव से ही अपने रिश्तेदार नातेदार से कर्ज लेकर किसी तरह से बेटी की शादी कर दी।किंतु अनुदान की आशा में औऱ भी कर्जदार हो गया।उधर बजट भी खत्म हो गया।जबकि नियमता 20 दिनों के अंदर रिपोर्ट लगाने का नियम है आखिर इतनी बिलंब से रिपोर्ट देने के पीछे अधिकारी की मंशा नियत पर प्रश्रचिन्ह लगना सौभाविक है।हमे तो ताजुब्ब हुआ कि इस अनुदान के लिये मेरे द्वारा भी खंडविकाश अधिकारी को 5 बार कहना पड़ा उसके बाद भी आज तक रिपोर्ट नही लगी।शादी अनुदान दिलाने वाले दलाल उसके घर के चक्कर जरूर काटने लगे।बडा ही दुर्भाग्य है कि समाज मे भ्रषचार की जड़े कहाँ तक पहुंच गई है समाज कहाँ जा रहा है अब गरीब बेटी की शादी में सरकार से मिलने वाले अनुदान में भी भारी कमीशन भ्रष्ट लोगो को चाहिये।एक समय वो भी था जब गांव में गरीब बेटी की शादी में लोगो बिस्तर चारपाई अनाज नगद कपड़े भेंट स्वरूप देते थे कि गरीब की बेटी की शादी है सब मिलकर अच्छे से हाथ लग कर निपटा दे।लोग गांव की बेटी को अपनी बेटी मानते थे और बिना कहे एक हल्दी या इलायची को ही निमंत्रण मान शादी के लिये स्वतः ही मदद के लिये आगे आते थे लेकिन समय बदल रहा है आज सब कुछ हाईटेक होता जा रहा है लोगो को गरीब की बेटी में मिलने वाले अनुदान में भी कमीशन चाहिये ऐसे समाज से बेहतर पहले का समाज हुआ करता था जहां रिश्ते नाते घर परिवार गाँव अपना से लगता था जहां स्वार्थ नही था निस्वार्थ लोग गरीब हो या अमीर हो सभी बेटी की शादी में अपना योगदान बढ़चढ़ कर देते थे।आज खबर लिखते दुख भी हो रहा है कि क्या इस समाज मे हम रह रहे है जहाँ इतने गिरे हुए स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है।खैर किसी तरह गरीब ने अपनी बेटी की शादी कर दी अब कर्ज से उभरने के लिये उसे सरकार से शादी अनुदान की दरकार है।ऐसे ही नगर की घसियारीपुर की राहें वाली पिछड़ी जाति की सुनीता केवट को शादी का अनुदान नही मिला सका और उसकी शादी की चिंता में उसकी माता का देहांत ही गया।किसी तरह से गरीब की बेटी की शादी हुई।ऐसे ही आज जिले की सैकड़ो गरीब बेटियो को शादी में मिलने वाले अनुदान में कमीशन खोरी के चलते रिपोर्ट के अभाव में अनुदान मिले बिना ही शादी हो जाती है।लेकिन इन अधिकारों पर भ्रष्टाचार इतना गहराई तक जा चुका है कि असर ही नही होता।आज भी सैकड़ो आवेदन शादी के अनुदान में रिपोर्ट के अभाव में लंबित है।