सावन 2018: जाने सावन में शिवलिंग के जलाभिषेक का महत्व

By - Jul 11, 2018 04:22 AM
सावन 2018: जाने सावन में शिवलिंग के जलाभिषेक का महत्व

सावन में शिवलिंग के जलाभिषेक का सबसे अधिक महत्व है। शास्त्रों के अनुसार जो मनुष्य श्रावण में ज्योतिर्लिंग के दर्शन और जलाभिषेक करता है उसे अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होते है। सावन इस महीने 28 जुलाई 2018 से आरंभ हो रहा है। जो श्रावण पूर्णिमा 2018 यानि 26 अगस्त को समाप्त होगा। शिवलिंग का श्रावण में जलाभिषेक के संदर्भ में एक कथा बहुत प्रचलित है।
इस कथा के अनुसार जब देवता और राक्षसों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए सागर मंथन किया तो उस मंथन समय समुद्र में से अनेक पदार्थ उत्पन्न हुए और अमृत कलश से पूर्व कालकूट विष भी निकला।
इसलिए किया जाता है शिवलिंग का जलाभिषेक 
विष की भयंकर ज्वाला से पूरा ब्रह्माण्ड जलने लगा। इस संकट से व्यथित सभी लोग भगवान शिव के पास पहुंचे और उनके समक्ष प्राथना करने लगे, तब सभी की प्रार्थना पर भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने हेतु उस विष को अपने कंठ में उतार लिया और उसे वहीं अपने कंठ में रोक कर रख लिया।
जिससे उनका कंठ नीला हो गया। समुद्र मंथन से निकले उस हलाहल के पान से भगवान शिव ने भी तपन को सहन किया था। अत: मान्यता है कि वह समय श्रावण मास का समय था। विष के तपन को शांत करने हेतु देवताओं ने गंगाजल से भगवान शिव का पूजन और जलाभिषेक आरंभ किया। तभी से यह प्रथा आज भी चली आ रही है प्रभु का जलाभिषेक करके समस्त भक्त उनकी कृपा को पाते हैं।