वसुंधरा राजे ने अमित शाह को दिखाया अपना दमखम

By - Jun 10, 2018 06:25 AM
वसुंधरा राजे ने अमित शाह को दिखाया अपना दमखम

नई दिल्लीः राजस्थान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के लिए पार्टी के भीतर पहला वाटरलू साबित हो रहा है। यद्यपि शाह 2019 के चुनावों की लड़ाई के लिए पार्टी को मजबूत बनाने के मकसद से मित्रों और दुश्मनों को लुभा रहे हैं मगर उनको राजस्थान में काफी असामान्य चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। 
वसुंधरा राजे ने किया झूकने से इंकार 
अमित शाह को 14 भाजपा शासित राज्यों में से किसी एक में भी ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली, जहां मुख्यमंत्री उनके पीछे दौड़ते नजर आते हों लेकिन वसुंधरा राजे सिंधिया ने इस संबंध में झुकने से इंकार कर दिया। उन्हें पिछले सप्ताह दिल्ली में पार्टी के नए प्रधान का चयन करने के लिए बुलाया गया था।अजमेर और अलवर उपचुनाव हारने के बाद अशोक परनामी ने इस्तीफा दे दिया था। यह दूसरी बैठक थी क्योंकि वसुंधरा राजे ने शाह द्वारा सुझाए गए केन्द्रीय मंत्री राजिंद्र सिंह शेखावत के नाम पर वीटो कर दिया था।
मुख्यमंत्री जाति मुक्त नेता प्रधान पद के लिए चाहती हैं। इसके विकल्प में उन्होंने एक सिंधी पंजाबी नेता श्रीचंद कृपलानी के नाम का प्रस्ताव रखा जिसे शाह ने नामंजूर कर दिया। अब ऐसी चर्चा है कि एक अन्य दलित केन्द्रीय मंत्री अर्जुन सिंह मेघवाल का नाम लिया जा रहा है लेकिन कुछ कारणों से मुख्यमंत्री ने इस नाम को भी नामंजूर कर दिया। समझौते के तहत पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र यादव के नाम पर चर्चा हो रही है। राजे इस नाम को स्वीकार करने की इच्छुक हैं मगर शाह का कहना है कि उनको दिल्ली में लोकसभा चुनावों के लिए उनकी सेवाओं की जरूरत है।
नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने के मुद्दे पर हो रहा विचार
वास्तव में भाजपा नेतृत्व ने एक बार वसुंधरा राजे को पद से हटाने और नया मुख्यमंत्री नियुक्त करने के मुद्दे पर विचार किया था मगर इस सशक्त मजबूत महिला ने स्पष्ट संकेत दे दिया कि उनको हल्का नहीं समझना चाहिए और वह आनंदीबेन पटेल नहीं जो आत्मसमर्पण कर देंगी। इस विचार को ठप्प कर दिया गया। अब चर्चा यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शीघ्र ही शाह और वसुंधरा राजे के बीच मतभेदों को सुलझाने के लिए आगे आएंगे। अमित शाह ने फैसला किया है कि वह इस बात को यकीनी बनाने के लिए अपनी राजनीति के तहत जयपुर में डेरा जमाएंगे ताकि भाजपा राजस्थान विधानसभा के चुनाव जीत सके। वह यहां कोई परिसर किराए पर नहीं लेंगे और जयपुर में रहकर खुद चुनावों की निगरानी करेंगे।