बैठे-बैठ इस मुद्रा को करने से बढ़ती है आंखों की रोशनी...

By - Jun 11, 2018 10:45 AM
बैठे-बैठ इस मुद्रा को करने से बढ़ती है आंखों की रोशनी...

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2018) पिछले तीन सालों से मनाया जा रहा है। 2018 में यह चौथी बार मनाया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर डायबिटीज और आंखों से जुड़ी समस्याओं के लिए योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं। नाभि के पास स्थित पैंक्रियाज ग्रंथि से इंसुलिन का स्राव कम हो जाने का परिणाम है-मधुमेह रोग। मधुमेह से मुक्ति के सारे उपाय वही हैं, जिनसे नाभि-क्षेत्र पर दबाव बनता हो अथवा उस स्थान की सक्रियता बढ़ती हो।
प्राण मुद्रा क्या है
मुद्रा चिकित्सा के अनुसार, मधुमेह शरीर में पृथ्वी, जल और अग्नि तत्वों के असंतुलन का परिणाम है। प्राण मुद्रा इन तत्वों को संतुलित करती है। इससे नाभि-क्षेत्र सहित पूरे शऱीर को अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है और पाचन-अंग विशेष रूप से सक्रिय होते हैं।
डायबिटीज के लिए फायदेमंद
मधुमेह के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने में यह उपयोगी है। लंबे समय तक अभ्यास किया जाए तो प्राण मुद्रा से इंसुलिन का पर्याप्त मात्रा में बनना शुरू भी हो सकता है। यदि मधुमेह के रोगी इसके साथ पृथ्वी मुद्रा भी करें तो उन्हें विशेष लाभ होगा।
आंखों के लिए फायदेमंद

  • हम 80 फीसदी ज्ञान आंखों से ही ग्रहण करते हैं। टेलीविजन और कंप्यूटर के आने के बाद एकटक देखने की लत बढ़ी है, जिससे आंखें जल्दी ही थक जाती हैं। प्राण मुद्रा, नेत्र रोगों में भी विशेष लाभकारी है।
  • यह नेत्र ज्योति बढ़ाती है और दृष्टि दोषों को दूर करती है। योगी-ऋषि इसी मुद्रा से अपनी प्राणिक ऊर्जा बढ़ाते थे। इससे न सिर्फ मोतियाबिंद जैसे रोगों से बचना संभव है, बल्कि छह महीने के नियमित अभ्यास से चश्मा भी उतर सकता है।
  • जिस मरीज़ की आंखों में बिल्कुल भी रोशनी नहीं है, प्राण-मुद्रा के नियमित अभ्यास से उसे भी लाभ होने की संभावना है।

मच्छरों से होने वाली बीमारियों के लिए फायदेमंद
बदलते मौसम में मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के साथ कई तरह के रोग होने की संभावना बढ़ जाती हैं। इनसे बचने और निज़ात पाने-दोनों ही के लिए प्राण मुद्रा लाभकारी है। इससे शरीर में कफ और अग्नि तत्व का संतुलन स्थापित होता है। खासकर, हृदय से कंठ तक के सभी रोग प्राण मुद्रा से दूर होते हैं। यह मुद्रा हमारी प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करती है। लकवे की कमजोरी, अनिद्रा, तन-मन की दुर्बलता, थकान और नस-नाड़ियों की पीड़ा को दूर करने में भी यह मुद्रा बहुत उपयोगी है।
इससे एकाग्रता बढ़ती है, रक्त शुद्ध होता है और रक्त वाहिनियों के अवरोध दूर होते हैं। यह मुद्रा बोलने की क्षमता बढ़ाती है। आशा, स्फूर्ति तथा उत्साह का संचार करती है। प्राण मुद्रा विटामिनों की कमी को दूर करती है और व्यक्ति को दीर्घायु बनाने में सहायक है।  
ऐसे करें प्राण मुद्रा
कनिष्ठा, अनामिका और अंगूठे के शीर्ष को मिलाएं। शेष अंगुलियां सीधी रखें। 
कितनी देर-धीमी-लंबी-गहरी श्वांस के साथ 45 मिनट रोज़ाना।